भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान, वाराणसी के 30वें स्थापना दिवस समारोह का आयोजन

Mon, 28 September 2020

भा.कृ.अनु.प.-भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान, वाराणसी के 30वें स्थापना दिवस समारोह का बेबीनार के माध्यम से आज 28 सितम्बर, 2020 को आयोजन किया गया। इस समारोह के मुख्य अतिथि डा. ए.के. सिंह, उप-महानिदेशक (उद्यान), भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद्, नई दिल्ली रहे। डा. सिंह ने संस्थान के सभी पूर्व निदेशकों के योगदान को याद करते हुये वर्तमान निदेशक के नेतृत्व में संस्थान में हो रहे कार्यों व उपलब्धियों की सराहना किया। उन्होने कहा कि सब्जी उत्पादन उद्यमिता व रोजगार सृजन के साथ-साथ देश के पोषण सुरक्षा व आत्मनिर्भरता का आधार है। सब्जी फसलों की उत्पादकता बढ़ाने व सब्जी फसलों के अन्तर्गत क्षेत्रफल बढ़ाने हेतु किसानों को उन्नत सब्जी उत्पादन की तकनीकियों को अपनाने की सलाह दिया। अपने उद्बोधन में कहा कि संस्थान ने विगत 29 वर्षों में सब्जी फसलों की 104 किस्मों को विकसित किया है और किसानों को कम दाम पर सब्जी फसलों के गुणवत्तायुक्त बीज उपलब्ध करा रहा है। उन्होने देशव्यापी अखिल भारतीय समन्वित शोध परियोजना की सहायता से सब्जियों से संबंधित शोध एवं प्रसार की उन्नत तकनीकियों को विकसित करने एवं द्वितीयक कृषि के अन्तर्गत मूल्य संवर्धन, भण्डारण एवं हरे मिर्च के पाउडर के प्रसंस्करण को अधिक प्रभावी बनाने की बात कही। उन्होने सब्जियों में पोषणीय व औषधीय महत्व वाले रसायनों की पहचान कर उनका अन्तर्राष्ट्रीय बाजार में विपणन करने की दिशा में कार्य करने का अनुरोध किया।
डा. विक्रमादित्य पाण्डेय, अतिरिक्त-महानिदेशक (उद्यान), भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली ने अपने उद्बोधन में संस्थान के उपलब्धियों की प्रशंसा किया। डा. पाण्डेय ने बागवानी में सब्जियों के बीज उत्पादन में निजी कम्पनियों के साथ प्रतिस्पर्धा की चुनौती को अवसर के रूप में स्वीकार करने की दिशा में ध्यान देने की बात कही। उन्होने सहजन (मोरिंगा) जैसी फसल के शोध की दशा व दिशा पर भी चर्चा किया। डा. गौतम कल्लू, पूर्व निदेशक ने वैज्ञानिकों को किसानों की आय दोगुनी करने एवं नई चुनौतियों के समाधान हेतु कार्य करने की बात बतायी। डा. मथुरा राय, पूर्व निदेशक ने संस्थान के क्षेत्रीय शोध परिसर, सरगटिया एवं कृषि विज्ञान केन्द्रों की स्थापना की गाथा एवं उनकी वर्तमान परिदृश्य में सब्जी फसलों की उन्नत उत्पादन तकनीकियों एवं कटाई उपरान्त प्रौद्योगिकी की तकनीकियों को विकसित कर किसानों को लाभान्वित करने की बात कही। डा. प्रकाश एस. नाइक, पूर्व निदेशक ने संस्थान के स्थापना का इतिहास बताते हुये कहा कि सब्जियों के उत्पादन में 183 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। सब्जी फसलों के बीज उत्पादन एवं सब्जी के निर्यात में पीड़कनाशियों के अवशेष संचयन के पहचान एवं निर्धारण हेतु संस्थान में संदर्भ प्रयोगशाला के स्थापना की आवश्यकता को बताया। डा. बिजेन्द्र सिंह, पूर्व निदेशक ने अपने अनुभवों को बताते हुये वैज्ञानिकों को सलाह दिया कि उन्हे किसानों के प्रक्षेत्रों का भ्रमण करते रहना चाहिये जिससे किसानों की समस्याओं का आसानी से समाधान हो सके। डा. सिंह ने वैज्ञानिकों से शोध पत्रों के प्रकाशन करने की बात भी कही। डा. जगदीश सिंह, निदेशक, भा.कृ.अनु.प.-भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान, वाराणसी ने अपने उद्बोधन में संस्थान की शोध परियोजनाओं व गतिविधियों एवं उपलब्धियों से अवगत कराया। उन्होने बताया कि वाराणसी सब्जियों के निर्यातक क्षेत्र के रूप में स्थापित हो रहा है। यहाँ से हरी मिर्च, सेम, बैंगन, करेला आदि सब्जी फसलें लन्दन एवं जर्मनी जैसे देशों को निर्यात की जा रही है। इस अवसर पर संस्थान के सिंहावलोकन की पुस्तिका, द्विभाषी सब्जी सूचना पत्र के साथ संस्थान के उत्पादों में काशी सूक्ष्मशक्ति, काशी बायोमैक्स एवं काशी जैव शक्ति का विमोचन किया गया। आभाषी (वर्चुअल) कार्यक्रम का संचालन डा. नीरज सिंह एवं धन्यवाद ज्ञापन डा. पी.एम. सिंह ने किया।